Thursday, September 10, 2026

रामेश्वरम धनुषकोडी तमिलनाडु Darshan call @ 8744992244

धनुषकोडी तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप के दक्षिण-पूर्वी छोर पर स्थित भारत का अंतिम स्थल है, जिसे राम सेतु (एडम्स ब्रिज) का शुरुआती या उद्गम स्थल माना जाता है।

पौराणिक और ऐतिहासिक महत्वराम सेतु का आरंभ: 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने अपनी वानर सेना के साथ मिलकर माता सीता को रावण की लंका से मुक्त कराने के लिए यहीं से समुद्र पर राम सेतु का निर्माण किया था। 

नाम का अर्थ: 'धनुषकोडी' नाम 'धनुष' और 'कोडी' (अंत) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है भगवान राम के धनुष का अंत। कहा जाता है कि लंका विजय के बाद, विभीषण के अनुरोध पर श्रीराम ने अपने धनुष की कोटि से इस पुल के एक हिस्से को तोड़ दिया था। 

मीठे पानी का कुएं का रहस्य: चारों तरफ खारे पानी के समुद्र से घिरे होने के बावजूद, यहां समुद्र के किनारे एक ऐसा कुआं है जिसका पानी मीठा है।)

1964 का चक्रवात और वर्तमान 

स्थितिघोस्ट टाउन (उजाड़ शहर): वर्ष 1964 में आए एक भयानक चक्रवात (तूफान) ने इस धनुषकोडी शहर को पूरी तरह तबाह कर दिया था, जिसके बाद इसे रहने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। 

अंतिम सड़क: रामेश्वरम से धनुषकोडी तक की लगभग 15-20 किमी की यात्रा के दौरान दोनों तरफ बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर का संगम दिखाई देता है। सुरक्षा कारणों और सुनसान रास्तों के कारण शाम ढलने के बाद पर्यटकों को यहां रुकने की अनुमति नहीं है।

डूबी हुई ट्रेन: रामेश्वरम से धनुषकोडी आ रही एक पूरी यात्री ट्रेन पानी की तेज लहरों में बह गई थी, जिसमें सवार सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। 

खंडहर और सन्नाटा: इस आपदा में करीब 1,800 लोग मारे गए। इसके बाद सरकार ने इस जगह को रहने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया। तब से यह वीरान पड़ा है और इसे 'प्रेत शहर' (Ghost Town) या खंडहरों का शहर कहा जाता है। यहाँ आज भी चर्च, रेलवे स्टेशन और पुराने मकानों के वीरान अवशेष मौजूद हैं। 

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